कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पात्र कंपनियाँ अपने मुनाफ़े का एक हिस्सा सामाजिक ज़िम्मेदारी पर खर्च करती हैं, और निवारक स्वास्थ्य इसके मान्य क्षेत्रों में है। मुश्किल नीयत की नहीं, डिलीवरी की रही है — यह भरोसा कि पैसा गाँव तक पहुँचा, असली मरीज़ों की जाँच हुई और पीछे कुछ टिकाऊ छूटा।
क्लिनिकवाला के पास यह ढाँचा पहले से चालू है: प्रशिक्षित स्थानीय साथियों के ई-क्लिनिक, जुड़े हुए जाँच उपकरण, जाँचे-परखे डॉक्टरों का नेटवर्क और मरीज़ के पास रहने वाले हेल्थ रिकॉर्ड। CSR साझेदारी अपना ढाँचा खड़ा करने की जगह इसी से जुड़ जाती है।
यह ढाँचा काग़ज़ी नहीं है। हमारे कार्यक्रम 1.5 लाख से ज़्यादा मरीज़ों तक पहुँचे हैं, 200 से ज़्यादा हेल्थ कैंप लगे हैं और 10,000 से ज़्यादा टेलिकंसल्टेशन हुए हैं — बिहार के 20 से अधिक ज़िलों में।
साझेदारी से क्या-क्या हो सकता है
कार्यक्रम आपके बजट और ज़िले के हिसाब से तय होता है; ये उसके बुनियादी हिस्से हैं।
हेल्थ कैंप
आपके चुने गाँवों में जाँच और परामर्श शिविर — डॉक्टर, उपकरण और फ़ॉलो-अप के साथ, सिर्फ़ एक दिन की तस्वीर नहीं।
प्रायोजित ई-क्लिनिक
किसी वंचित कस्बे में पूरा ई-क्लिनिक, प्रशिक्षित स्थानीय साथी के हाथों, आपके कार्यक्रम के नाम के साथ।
मोबाइल हेल्थकेयर
उन बस्तियों के लिए क्लिनिक-ऑन-व्हील्स, जो स्थायी क्लिनिक के लिए बहुत छोटी या दूर हैं।
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड
जाँचे गए हर मरीज़ को अपना रिकॉर्ड मिलता है, चाहें तो ABHA से जुड़ा — कैंप का काम कैंप के बाद भी चलता है।
भरोसेमंद रिपोर्टिंग
मरीज़ों की संख्या, नतीजे और रेफरल हर दौरे पर दर्ज — ताकि आपकी CSR रिपोर्ट इरादों की नहीं, काम की बात करे।
काम करने वाली इकाइयाँ
हर कार्यक्रम आपके साथ मिलकर बनता है
ज़िलों का चुनाव, लागत और रिपोर्टिंग का प्रारूप हर साझेदार के हिसाब से तय होते हैं — कोई बना-बनाया पैकेज नहीं। आप जिन ज़िलों में काम करना चाहते हैं और जो बजट सोच रहे हैं, हमें बताइए; हम लागत सहित कार्यक्रम आपके सामने रखेंगे।
हमसे बात कीजिए